एक थी रोशी....
ये कहानी हैं। उन गर्मीयों के दिनों की। जब मेरी मूलाकात मेरे दोस्त से हूई। उस दिन वो बहूत ही ज्यादा खूश था। मानों कि जैसे कोई छोटा बच्चा खिलोने कि जिद कर रहा हो। और उसे वो मिल जाऐ। जैसे एक उम्मीद कि रोशनी । उसे मिल गई हों। हां मैं उस हमसफ़र की बात कर रहा हूं। जिसे हर कोई पाना चाहता हों। अपनी जिंदगी में एक बार उसे महसूस करना चाहता हों। उसने अपने बारे कूछ इस तरह बताया। कि रात का पहरा था। और निंद का कोई ठिकाना नहीं था। तभी उसने फैसबूक को चलाना शुरू ही किया था। फैसबूक खोलते ही उसने किसी अनजान लड़की को देखा है। उसने उस लड़की की Profile देखी। उसने बताया कि उसे देख कर मन को तसल्ली सी हूई। उसके सारे विचार उसे देख के शान्त से हो गये थे। हां मेरे भाई का नाम विक्की था। विक्की ने अपने दिल को समझाते हुए । उस अनजान लड़की को एक "Hy" का मैसेज कर दिया । ऐसा नहीं हैं कि औरो से बात नहीं करता था। पर विक्की ने भी बताया उसे देख कर मानों समूद्र की लहरों मैं ठहराव सा आ गया हो। उसके मैसेज भेजने के ३ घंटे बाद । हां वो समय १०:४० का था। जब उस अनजान लड़की का बापिस मैसेज आया "Hey" । उस मैसेज को देखकर विक्की को ऐसा लगा कि जैसे चकोर को चांद मिल गया हो। उस रात दोनों मैं काफी समय तक बात हूं। उस अनजान लड़की ने अपना नाम रोशी बताया ।